1. गांधार……..

आज के कंधार को कभी गांधार के रूप में जाना जाता था। यह देश पाकिस्तान के रावलपिन्डी से लेकर सुदूर अफगानिस्तान तक फैला हुआ था।

धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी वहां के राजा सुबल की पुत्री थीं। गांधारी के भाई शकुनी दुर्योधन के मामा थे।

2. तक्षशिला…….

तक्षशिला गांधार देश की राजधानी थी। इसे वर्तमान में रावलपिन्डी कहा जाता है। तक्षशिला को ज्ञान और शिक्षा की नगरी भी कहा गया है।

3. केकय प्रदेश……..

जम्मू-कश्मीर के उत्तरी क्षेत्र का उल्लेख महाभारत में केकय प्रदेश के रूप में है। केकय प्रदेश के राजा जयसेन का विवाह वसुदेव की बहन राधादेवी के साथ हुआ था।

उनके पुत्र विन्द व जरासंध, दुर्योधन का मित्र थे। महाभारत के युद्ध में विन्द ने कौरवों का साथ दिया था।

4. मद्र देश……

केकय प्रदेश से ही सटा हुआ मद्र देश का आशय जम्मू-कश्मीर से ही है। एतरेय ब्राह्मण के अनुसार, हिमालय के नजदीक होने के कारण से मद्र देश को उत्तर कुरू भी कहा जाता था।

महाभारत काल में मद्र देश के राजा शल्य थे, जिनकी बहन माद्री का विवाह राजा पाण्डु से हुआ था। नकुल और सहदेव माद्री के पुत्र थे।

5. उज्जनक…….

आज के नैनीताल का वर्णन महाभारत में उज्जनक के रूप में किया गया है। गुरु द्रोणचार्य यहां पांडवों और कौरवों की अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा देते थे।

कुन्ती पुत्र भीम ने गुरु द्रोण के आदेश पर यहां एक शिवलिंग की स्थापना की थी। यही कारण है कि इस क्षेत्र को भीमशंकर के नाम से भी जाना जाता है।

यहां भगवान शिव का एक विशाल मंदिर है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यह शिवलिंग 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक है।

6. शिवि देश……

महाभारत काल में दक्षिण पंजाब को शिवि देश कहा जाता था। महाभारत में महाराज उशीनर का वर्णन है, जिनके पौत्र शैव्य थे।

शैव्य की पुत्री देविका का विवाह युधिष्ठिर से हुआ था। शैव्य एक महान धनुर्धारी और महारथी थे और उन्होंने कुरुक्षेत्र के युद्ध में पांडवों का साथ दिया था और अर्जुन का साथ देते हुए युद्ध जीतने में अतुलनीय योगदान किया।

7. वाणगंगा…..

कुरुक्षेत्र से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है वाणगंगा। कहा जाता है कि महाभारत की भीषण लड़ाई में घायल पितामह भीष्म को यहां सर-सैय्या पर लिटाया गया था।

कथा के अनुसार भीष्म ने प्यास लगने पर जब पानी की मांग की तो अर्जुन ने अपने वाणों से धरती पर प्रहार किया और गंगा की धारा फूट पड़ी। यही कारण है कि इस स्थान को वाणगंगा कहा जाता है।

8. कुरुक्षेत्र……

हरियाणा में कुरुक्षेत्र स्थित है। यहां महाभारत की प्रसिद्ध लड़ाई हुई थी। यही नहीं, आदिकाल में ब्रह्माजी ने यहां यज्ञ का आयोजन किया था।

इस स्थान पर एक ब्रह्म सरोवर या ब्रह्मकुंड भी है। श्रीमद् भागवत में लिखा हुआ है कि महाभारत के युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने यदुवंश के अन्य सदस्यों के साथ इस सरोवर में स्नान किया था।

9. हस्तिनापुर…..

महाभारत में उल्लिखित हस्तिनापुर का क्षेत्र मेरठ के आसपास है। यह स्थान चन्द्रवंशी राजाओं की राजधानी थी।

सही मायने में महाभारत युद्ध की पटकथा यहीं लिखी गई थी। महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने हस्तिनापुर को ही अपने राज्य की राजधानी बनाया।

10. वर्णावत……

यह स्थान भी उत्तर प्रदेश के मेरठ के नजदीक ही माना जाता है। वर्णावत में पांडवों को छल से मारने के लिए दुर्योधन ने लाक्षागृह का निर्माण करवाया था।

यह स्थान गंगा नदी के किनारे है। महाभारत की कथा के अनुसार, इस ऐतिहासिक युद्ध को टालने के लिए पांडवों ने जिन पांच गांवों की मांग रखी थी, उनमें एक वर्णावत भी था।

आज भी यहां एक छोटा सा गांव है, जिसका नाम वर्णावा है।

11. वृन्दावन…..

यह स्थान मथुरा से लगभग 10 किलोमीटर दूर है। वृन्दावन को भगवान कृष्ण की बाल-लीलाओं के लिए जाना जाता है। यहां का बांके-बिहारी मंदिर प्रसिद्ध है।

12. गोकुल……

यमुना नदी के किनारे बसा हुआ यह स्थान भी मथुरा से लगभग 8 किलोमीटर दूर है।

कंस से रक्षा के लिए कृष्ण के पिता वसुदेव ने उन्हें अपने मित्र नंदराय के घर गोकुल में छोड़ दिया था। कृष्ण और उनके बड़े भाई बलराम गोकुल में साथ-साथ पले-बढ़े थे।

13. मगध……

दक्षिण बिहार में स्थित मगध जरासंध की राजधानी थी। जरासंध की दो पुत्रियां अस्ती और प्राप्ति का विवाह कंस से हुआ था।

जब भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया, तब वह अनायास ही जरासंध के दुश्मन बन बैठे। जरासंध ने मथुरा पर कई बार आक्रमण किया।

बाद में एक मल्लयुद्ध के समय भीम ने जरासंध का अंत किया। महाभारत के युद्ध में मगध की जनता ने पांडवों का समर्थन किया था।

14. द्वारका (द्वारका)……

माना जाता है कि गुजरात के पश्चिमी तट पर स्थित यह स्थान कालान्तर में समुन्दर में समा गया,

इस अद्धभुत नगरी का निर्माण भगवान श्री कृष्ण की आज्ञा से महान देव शिल्पी विश्वकर्मा जी ने किया था।

कथाओं के अनुसार, जरासंध के बार-बार के हमलों से यदुवंशियों को बचाने के लिए कृष्ण मथुरा से अपनी राजधानी स्थानांतरित कर द्वारका ले गए।

15. अंग देश……

वर्तमान में उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के क्षेत्र का उल्लेख महाभारत में अंगदेश के रूप में है।

दुर्योधन ने कर्ण को इस देश का राजा घोषित किया था। मान्यताओं के मुताबिक, जरासंध ने अंग देश दुर्योधन को उपहारस्वरूप भेंट किया था।

इस स्थान को शक्तिपीठ के रूप में भी जाना जाता है।

16. चंदेरी…..

चंदेरी मध्यप्रदेश के अशोक नगर जिले में स्थित है। आज के समय में चंदेरी की पहचान यहां की कशीदाकारी और साडिय़ों के लिए है,

लेकिन चंदेरी का इतिहास भी उतना ही गौरवशाली है, जितनी प्रसिद्ध यहांं की कशीदाकारी है। इस ऐतिहासिक शहर का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है।

11वीं शताब्दी में यह एक महत्वपूर्ण सैनिक केंद्र था और प्रमुख व्यापारिक मार्ग भी यहीं से होकर गुजरता था। यहां ऐसी कई ऐतिहासिक इमारतें हैं, जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं।

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